• shayar_tera 22w

    किस दर्द का हिसाब करना मुनासिब होगा मुझे भी बता दे,
    तेरे आगे अपनी सारी ज़िन्दगी देखीं है जो लम्हे न देख पाया आखिर क्यों ज़रा मुझे समझा दे।

    अब अकेले जिस रास्ते से गुजरता हूँ वो रास्ते पूछते है,
    वो रहगुजर आखिर ये माज़रा क्या है अकेले क्यों चल रहा तुम्हारी दुनिया कहा है।

    एक राज़ की बात है जो मैंने शायद ही किसी को बताई है,
    तुम देख कर समझ नहीं पाओगे आखिर ये कैसी बात है।