• 0_manni 24w

    आसमान-पंछी

    तुम्हारी याद ना अभी आई है ना कभी आएगी,
    तुम तो मेरी ज़िंदगी का वो सबक हो
    जिसे हर क्षण अपने साथ लिए आगे बढूंगी;
    क्योंकि ऐ-मेरे बेज़ान आसमान,
    मैं आज भी वही बेखौफ बेपरवाह पंछी हूँ,
    जो किसी भी रिश्ते को बंधन में नहीं जकड़ती।
    हां जानती हूँ मैं कि तुम इतने विशाल हो
    की शायद मेरे इन खूबसूरत पंखों को अपनी हवाओं से कुचल दो;
    पर कई हमदर्द हमराही सफ़र में हैं साथ मेरे,
    मैं ठहर के डाली पर रूक जाऊँगी;
    तुम तक आने के लिए सफ़र की शुरुआत ही कहां की थी,
    जो तुम पर पहुंच कर मैं सिमट जाऊँगी।
    ©0_manni