• kishore_nagpal 23w

    रिश्ते

    कितने अनमोल है ये
    गुरुजी के बनाये रिश्ते
    देखा किसी को नही
    जानते किसी को नही
    फिर भी अपने से लगते है
    दिल की बाते साँझी करते है
    और खुद को हल्का महसूस करते है ।
    शायद यह कहना कि वो
    इंसान था ही हीरा
    ये उतना सही ना होगा
    वरन् ये कहना ज्यादा ठीक होगा
    जिसे गुरुजी ने अपनी शरण में लिया
    वो हीरा बन गया ।
    वरन् मिलते तो हम सब
    लोग रोज ही बहुतो को है
    ना सब से दिल का हाल कह पाते है
    ना सभी दूसरो के
    दिल की बात समझ पाते है ।
    एक विशेष सा अपनापन,
    एक माँ जैसा प्यार
    एक पिता जैसा माधुर्य,
    एक बहन जैसी अपने पन की चिंता
    एक भाई जैसा दुलार
    सब कुछ सीमाओ से भी ज्यादा...
    मानो अब एक नया संसार बन गया है
    जिसमे किसी को ना देखे हुये
    ना जानते हुये हुये भी
    एक उस डोर से बंधे है आपस में जो
    किसी अपनो से भी ज्यादा
    अपनापन देती है

    हर खुशी में साथ खडे होते है
    ये साथ मुस्कराने के लिये
    हर दुख में साथ खडे होते है ये
    अपनी गोद में सिर रखकर
    रोने देने के लिये....
    एक दूसरे की आध्यात्मिक यात्रा में
    साथ देने के लिये
    अपने अपने अनुभव साझा करके
    एक दूसरे की साधना को
    आगे बढाने में सहयोग के लिये
    वो भी इतने निर्विकार और
    समर्पित भाव से कि
    कभी कभी तो लगता है
    मानो स्वयं गुरुजी आकर
    एक एक शंका दूर कर रहे है
    और साधना की बारीकिया
    समझा रहे है
    हर घडी हर क्षण
    इतना सुन्दर सत्संग
    हर घडी हर क्षण
    एक दूसरे के बिल्कुल साथ ही
    एक दूसरे के सुख दुख के सच्चे साथी



    क्या कहा जाये
    गुरुजनो द्वारा बनाये इस
    श्री रामशरणम् परिवार के लिये ।



    शब्द हीन....शब्द हीन....शब्द हीन

    शुकराना गुरुदेव
    कोटि कोटि शुकराना
    लख लख धन्यवाद
    शत् शत् वंदन

    इतना सुंदर श्री राम शरणम् परिवार देने के लिये ।
    ©kishore_nagpal