• promeetsrivastava 25w

    .

    ना मस्ज़िद में चैन था,
    ना मंदिर में,
    उन सवाल उठाने वालों को,
    अहमक़ फर्क़ निकालने निकले थे,
    दुआ और प्रार्थना में,
    पहुँच तो गए राम मंदिर बनवाने,
    उन पाक मस्जिदों का अपमान करके,
    कम्बख़त कुछ हाज़िल न करपाये,
    अहमक़ नफ़रत ढूंढने निकले थे,
    हिन्दू-मुस्लिमो मे.








    ||प्रोमीत||