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    नज़र

    रुक कर देख तो लें ज़रा एक बार तेरे आशियाने को
    देख तो लें ज़रा, के आजकल किनका बसेरा है जहान में तेरे
    के कौन अब तेरे नैनों के नीर को रोक देता है
    कौन है अब दिलों जान में तेरे
    ऐसा तो नहीं के मुझे शक हो तुम पर
    मुझे यकीं मेरे शक पर ऐसा है
    जैसे शीशा टूटना ही है
    जैसे साथ तेरा छूटना ही है
    बस ऐसा ही है,वैसा ही था
    तेरा आशियाँ कभी,मेरा भी तो था
    तो क्या हर्ज़ होना चाहिए मुझे
    दिल मेरा ग़र तूने तोड़ा है
    ये हक मुझे तराशने का
    मैंने ही तो दिया तुझे था!
    ©aksroohi_writeups