• salaam 17w

    सत्य अहिसां की धरती पर,
    क्युँ बीज नफ़रत के बोते हो |
    किसी गैर के भड़काने पर,
    क्युँ अपना आपा खोते हो ||

    क्या ला सकते हो उनको वापस,
    जिनके तुमने प्राण लिए ?

    बहुत कर ली अपने दीन की वकालत,
    बहुत अपनी औकात बता लिए |
    अब बस भी करो ख़ुदा के वास्ते,
    रहम करो भगवान के लिए !

    ©salaam