• reena_vashisth 17w

    ऐ जिंदगी

    खुद को समझने की कोशिश में खुद को आजमा रहीं हूँ
    ऐ जिंदगी मैं रोज तेरे और करीब आती जा रहीं हूँ
    किस्से कहानियों की दुनिया में खुद को उलझा रहीं हूँ
    आजकल खुद को सच से रूबरू कराती जा रहीं हूँ
    अपने से लगने वाले हर शख्स को समझा रहीं हूँ
    अनजानों की दुनिया में गुमनाम सी खोती जा रहीं हूँ
    खुद का कहा खुद से लिखवा रहीं हूँ
    चुप होकर आज मैं खुद को दफनाती जा रहीं हूँ
    तेरे आगे खुद को आज ऊँचा उठा रहीं हूँ
    माँ के आगे सजदे में सर झुकाती जा रहीं हूँ
    हौसलौं को अपने आज नयी उड़ान सीखा रहीं हूँ
    ऐ जिंदगी मैं रोज तेरे और करीब आती जा रहीं हूँ

    खुद की बनायी बंदिशों को आज खुद से तुड़वा रही हूँ
    उलझी सी जिंदगी को बेमन से सुलझाती जा रही हूँ
    चुप रहकर आज भी मैं खुद को कमजोर कहलवा रही हूँ
    आजकल खामोशी को अपना हथियार बनाती जा रही हूँ
    खुद पर यकीन अब कहीं अंधेरों में गँवा रही हूँ
    रिश्तों पर भरोसा दस्तूर ये अब निभाती जा रही हू
    सब साथ है मेरे यह पाठ खुद को सिखला रही हूँ
    अकेले चलने के हुनर को भी अपनाती जा रही हूँ
    अपनी रंजिशों की दुनिया से खुद को निकलवा रही हूँ
    अपनी हँसी से आज मैं सबको हँसाती जा रही हूँ
    खुश रहने के तरीके मुस्कुरा कर सबको बता रही हूँ
    ऐ जिंदगी मैं रोज तेरे और करीब आती जा रहीं हूँ

    सवालों के घेरों से मैं खुद को बचा रही हूँ
    जवाबों को ढूंढने की कोशिश करती जा रही हूँ
    आसानी से समझ आ जाऊं ऐसा खुद को बना रही हूँ
    खुद के लिए ही अनसुलझी पहेली बनती जा रही हूँ
    रोते हुए अश्कों को थामना सबको सीखा रही हूँ
    और मैं पागल खुद के लिए ही रोए जा रही हूँ
    सपनों तक पहुंचने के रास्ते बना रही हूँ
    अनजान रास्तों से भी डरती जा रही हूँ
    उम्र छोटी सही पर हौसले बुलंद बना रही हूँ
    तजुर्बे वाली जिंदगियों से बहुत कुछ सीखती जा रही हूँ
    खुद को समझने की कोशिश में खुद को आजमा रहीं हूँ
    ऐ जिंदगी मैं रोज तेरे और करीब आती जा रहीं हूँ