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    ता-उम्र बस आपके हैं एतबार हमारा करना,
    ख़ुशी में चाहे भुला दो गम में पुकारा करना.

    हम सर-ए-राह बिखर जायेंगे खुश्बू बनकर,
    किस पहर गुज़रोगे महज़ इक इशारा करना.

    लड़खड़ा गर जाऊं कभी ज़िन्दगी के मोड़ों पे,
    हाथ मेरा तुम ही थामना और सहारा करना.

    इन्साँ ही हूँ खता करना है शुमार फितरत में,
    इनायत ये जारी रहे हम पे न किनारा करना.

    कामयाब कर ही देगा आपका इश्क नादाँ को,
    फिर आप भी एहल-ए-जुनूँ का नज़ारा करना.

    स्याह रात भी तड़पाती है आपका नाम लेकर,
    चिराग-ए-इश्क का इन रातों में शरारा करना.

    बड़े अज़ाब से संभाल पाया हूँ खुद को टूटने से,
    अब कभी सवाल-ए-फ़िराक़ ये न दोबारा करना.

    'आदि' ना खोलेगा आपके हुज़ूर में ज़ुबाँ अपनी,
    जवाब-ए-सवाल-ए-वस्ल आप भी गवारा करना.
    ©text_maker_