• neerajupadhyay 15w

    तहजीब

    तहजीब देखता हूँ मैं गरीबों के घर में.....
    दुपट्टा फटा हो फिर भी सिर पर होता है.....
    ख़ुशी देखता हूँ उन आँखों में.....
    भले ही रोटी एक हो मगर फिर भी पुरे परिवार को निवाला मिलता है.....
    रुपियो के मिलने से नही दिखती चमक उनके चेहरों पे.....
    वो चमक तो दिखती है जब उनकी मुलाकात अपनो से होती है.....

    ©neerajupadhyay