• pankajsingh22 16w

    दूरियां

    लापता क्यों है हम गम के साये में,
    या फिर जीने में क्यों मजबूरिया बहुत है,
    हर पल खुल कर जीये,क्योंकि
    जीने और मरने के बीच दूरियां बहुत है।

    उन आवाज़ों को भी सुनिए जो आपको बुरा कह जाता है,
    उसके कुछ शब्दों में ज़रा आपका फिक्र रह जाता है,
    बस कमी यह है कि आप उसे दिल पर ले जाते है,
    जिस पानी मे न बहना है उसमें बह जाते है,
    खुश रहने के लिए इनको भूलने की जरुरिया बहुत है,
    बहुत खुशनसीब है आप आपके साथ कोई है,
    वरना जीने और मरने के बीच दूरियां बहुत है।

    ज़रा कभी उन रास्तो में रुक जाइये जहाँ आपका मन लग जाता है,
    या फिर वो समा बनाइये जहाँ दुःख थम जाता है,
    इन पलो को अपने ज़िन्दगी में सजाइये,
    वरना मिटाने के लिए फ़ितूरिया बहुत है,