• drmanishayadava 14w

    मैं कहती थी वो सुनती थी
    यूँ ही हर रोज़
    मेरे बड़े होने का सपना वो बुनती थी
    सोचती थी कि
    कब वो कहेगी और मैं सुनूँगी
    एक दिन मैं बड़ी हो गई
    पर अब भी मैं कहती हूँ
    और वो सुनती है
    ऐसा कभी हुआ ही नहीं
    कि वो कहे और मैं सुनूँ
    अपने दिल की कहे बग़ैर फिर भी
    वो मेरी कामयाबी की दुआ बुनती है
    काश की मेरे ख़ुद के उसकी जगह
    आने से पहले मैं ये समझ पाती
    कि उसके हाथों में कितनी शफ़ा है
    और मेरी बातों में कितने नश्तर
    मेरे आज के पीछे ना जाने
    उसकी कितनी जागती रातों की दुआ है
    पर ये सिलसिला सदियों से चल रहा है
    और सदियों तक चलता रहेगा
    वो माँ है साहब उसकी आँखों में तो
    हमेंशा मेरी कामियाबी का सपना पलता रहेगा।
    -डॉ.मनीषा


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