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    लड्डू बांटू

    दोस्तो आज दर्शन हो गए है उनके
    जिनके बरसों से चाहत थी
    दिल तो कर रहा है सबको लडडू बांटू
    पर क्या करूँ अभी तक शायरी की किताब
    जो बेचने को लगाई है...बिकी नहीं है



    © रवि