• muskansaxena315 3w

    कि ऐसा क्यों है,
    कि ऐसा क्यों है कि है प्यार मगर फिर भी है इश्क़ अधूरा..,
    नमाज़ों में नज़्मों में नाम उसी का पढ़ता है दिल मेरा!
    कि ऐसा क्यों है,
    कि ऐसा क्यों है कि ख़्वाबों में भी अब दस्तक देता है वो,
    मेरी आंखों में भी अब दिखता रहता है उसका ही चेहरा!
    कि ऐसा क्यों है,
    कि ऐसा क्यों है कि मैं रातों को जागा करता हूं अक्सर,
    उसे खोया था जिस पल अब भी मेरा वक्त वहीं है ठहरा..
    कि ऐसा क्यों है,
    कि ऐसा क्यों है कि अब दवा-दुआ भी काम नहीं है आती,
    दर्द बन गया घाव और घाव मेरा होता जाता है गहरा!

    ©muskansaxena315