• roohofficials 24w

    "रूह" दफ़न है,
    हंसी ओढ़ के रखता हूँ ,
    मानों जैसे कफ़न है ।

    क़दम लडखडाते हैं ,
    तेरी यादों में चलते हैं,
    जब सब सो जाते हैंl

    आँखों में ज़ख़्म से हैं,
    दिल की तिजोरी में बंद हैं आंसू,
    मानों जैसे रकम से हैं।

    लब थरथर्रा ही जाते हैं,
    जब कहीं तेरा ज़िक्र चलता है,
    हम जाना घबरा ही जाते हैं।

    R O O H
    ©roohofficials