• rahulkashyap 10w

    बंदिश मै बैठा, एक आवारा परिंदा।
    अपनी आजादी की खेर मनाता है,

    रहता था जो कभी खोया,
    जिंदगी की हरियाली में मसरूफ।

    आज वो एक लकड़ी के झूले पर बैठा,
    रिहाई की ख़ाहिश में ज़िन्दगी बिताता है।


    ©rahulkashyap