• _sunny 22w

    तू तो धरम में फसां रहा
    पर उसकी कहानी अधूरीं हैं
    आख़ें मूंद कर ही चला कर तू
    कि कैंडल मार्च ज़रूरी हैं..
    ..
    घूर घूर के देख़ा तूने
    अफ़साना भी बना लिया
    इन्साफ़ मांगने निकलतें हो
    ख़ुद को कैसा दग़ा दिया..
    ..
    लुट गई इज़्जत अब तो तेरी
    बहन बेटियों की बाबू
    तख़ता लिए फ़िरता था
    अब किधर देख़ रहा हैं.........तू
    ..
    दो मूहा रावण तुझमें
    छी मैनें क्या कह दिया
    सीता मां को देख़ के उसने
    ब्राहमण जैसा करम किया..
    ..

    कि कैंडल मार्च ज़रूरी हैं
    हां

    कि कैंडल मार्च ज़रूरी हैं
    ..
    गांधी बाबा मत कर अब तो
    इक कहानी अधूरीं हैं
    कि हिंसा ही हिंसा हो
    अब सुभाष ज़रूरी हैं
    बस सुभाष ज़रूरी हैं
    ©sunnY