• raahhi 23w

    द्रोपदी

    भरी सभा में कुलवधू को
    जब तुमने निरवस्त्र किया था
    आज कैसे कर लें उम्मीद की
    दुर्योधन न बनोगे तुम?

    कैसे मानें न बनकर दुशाशन
    मेरी लाज रखोगे तुम?
    कुन्तीपुत्रों के समान न सर झुकाकर
    मेरी आन बचाओगे?
    मोहन जैसे कर वस्त्र प्रदान
    लाज मेरी रख पाओगे ?
    कैसे मानें भीष्म समान न
    मेरा अपमान सहोगे तुम?
    आज कैसे कर लें उम्मीद की
    दुर्योधन न बनोगे तुम?
    ©raahhi