• hathwalathakur 15w

    फ़िक्र

    तुझे ही मेरी फ़िक्र न है वरना, वो देख !,
    सारा शहर मोहब्बत को मुझसे और 
    मुझको महब्बत से जानता है !

    तू खुद नाप ले मेरी मुहब्बत का पैमाना !
    मेरे शहर के हर मयखाने का प्याला ,
    तेरा नाम जानता है !

    अब तो मेरी रूह भी वाकिफ है तेरी वफाई से ,
    पर ये दिल मेरे अंदर होके भी मेरी बात न मानता है !
    मैं भी चाहता हूँ तुझे भुला दू तेरी ही तरह !
    पर क्या करूँ ,
    कुछ इस कदर बस गयी है तू मुझमे ,
    की मेरा रोम रोम मुझे अब तुझसे पहचानता है !

    सिर्फ एक तू ही है जिसे मेरा प्यार न दिखा 
    वरना सारा शहर मुझे तेरे आशिक़ के नाम से जानता है !
    तेरे सिवा मेरे पास कुछ न था खोने को ,
    पर तेरे जाने के बाद ये शराब का प्याला मुझे संभालता है !

    मेरी हालत अब उस शीशे सी रह गई है फकत !
    टूट भी जाऊँ सौ टुकड़ो में मगर ,
    हर टुकड़ा तेरे अक्स को खुद का गवाह मानता है !


    ©the3amtales (आदित्य प्रताप सिंह)