• mukesh_nagar 6w

    एकु मैं मंद मोहबस कुटिल हृदय अग्यान।
    पुनि प्रभु मोहि बिसारेउ दीनबंधु भगवान।

    एक तो मैं मंदबुद्धि, दूसरे मोह के वश में, तीसरे हृदय का कुटिल और अज्ञानी हूँ, फिर हे दीनबंधु भगवान्‌! प्रभु आप ने भी मुझे भुला दिया!