• rajachaubey 3w

    तुम्हारी यादें

    तुम्हारी यादों ने मुझे ऐसे जकड़ लिया है
    जैसे किसी ऑक्टोपस ने मुझे पकड़ लिया है।।

    अब क्या बोलें कुछ कहा भी नहीं जाता
    तुम्हें देखे बिना अब रहा भी नहीं जाता।।

    अब तो हो गया हूँ मैं बेचैन
    क्योंकि अब तो सिर्फ तुम्हें ही ढूँढते हैं मेरे नैन।।

    तेरे दीदार को हो गया हूँ मैं बेताब
    अब तो बिल्कुल भी नहीं सुहाता ग्लोबल पॉलिटिक्स वाला किताब।।

    क्या बताएँ कि आशिकी के मामले में कितने सच्चे हैं हम
    लास्ट सेमेस्टर रिजल्ट में 5 में से 3 विषय में बैक से बचे हैं हम।।

    क्या बताएँ कि कैसे जी रहे हैं हम
    दारु नहीं पी सकते
    इसीलिए पानी में ही आइस क्यूब डालकर पी रहे हैं हम।।

    तुम्हारे लिए लिखते-लिखते मेरी उंगलियों में ठेले हो गए हैं
    अब तो हम और तुम एक - दूसरे के लिए मील के ढेले हो गए हैं।।

    अंत में बस यही कहना चाहूँगा कि
    अपनी यादों को समझा दो
    वह मुझे रात में सोने नहीं देते
    कम्बखत मोतियाबिंद के कारण मेरे आँख भी मुझे रोने नहीं देते।।

    अगर अब भी तुम मुझे करोगी इग्नोर
    फिर भी मैं सिर्फ इतना ही कहूँगा
    आई लाइक यू मोर।।
    आई लाइक यू मोर।।

    सादर धन्यवाद।

    ©rajachaubey