• pratyancha 11w

    विदा

    जीवन है गतिमान रे साथी
    फिर कहीं मिल जाएँगे
    कभी सबेरे कभी शाम में
    कभी धुप में कभी छाँव में
    जब भी हो फुर्सत के क्षण
    बस याद हमें तुम कर लेना
    हम धन्य वहीं हो जायेंगे
    जीवन है गतिमान रे साथी
    फिर कहीं मिल जाएँगे

    पथ अलबेला
    जीवन मेला
    चलते चलते राहों पे
    लगे जो तुमको कभी अकेला
    बस ऑंखें बंद कर लेना
    हम दौड़ के फिर आ जाएँगे
    जीवन है गतिमान रे साथी
    फिर कहीं मिल जाएँगे

    विदा कहे हम तुमको कैसे
    नयन मेरे भर आते है
    पग जो पीछे बढ़ते
    तो पड़ते पड़ते रुक जाते है
    पर शुभ विदाई तुमको
    यादों की शहनाई तुमको
    पथ पथ पे विजय हो तुमको
    शब्द नहीं अब का से कहूँ
    बस यूँ ही हँसाते रहना
    फिर से हम मिल जाएँगे
    जीवन है गतिमान रे साथी
    फिर कहीं मिल जाएँगे
    Ⓒpratyancha