• mithilesh 5w

    रिश्ते

    जब से सृष्टी कि रचना हुई तब से समय के चक्र पर उसकी गति के साथ हर चीज उसके साथ साथ चलती गई और वर्तमान अतीत में बदलता चला गया ।समय के साथ ही तो जिन्दगी भी चलती जाती है।और सृष्टी के अंश के रूप में जिन्दगी कि धुप-छांव से गुजरते हम कभी खुशी से खिलखिला जाते है तो कभी  गम के बादलों से भींग भी जाते है।कभी अपनों का साथ कई जिन्दगी जि लेने कि तसल्लि देता है तो कभी साथ छुट जाने का गम ताउम्र कि कसक बन जाता है।मगर वक्त़ नहीं रुकता।उसके साथ हमें भी चलते जाना होता है जैसे जिन्दगी किसी दौड़ में शामिल हो।पर हम समय कि तरह उन्मुक्त निर्बंध या आजाद कहाँ होते हैं कोई पाबंदी नहीं होती मगर तब भी अपनों के साथ रिश्तों कि खुशबू में जीना ही सुहाता है हमें ।तिनका तिनका जोड़ के बनाये आशियाने में रिश्तों को साथ ले कर चलना हर जिन्दगी का हसीन ख्वाब होता है।मकान बड़ा हो या छोटा प्यार कि खुशबू अपनों का साथ उसे घर बना देता है।जहां हर दिल में हसरत जीती है,रिश्तों में प्यार पलता है और आंखों में पलते सपने मंजिल का पता देते है।

    Mithilesh singh