• yaadoon_k_idiot_box_ 14w

    #KBTJH

    तू बेपरवाह सा हस हस कर उसे न्योता दे जाती
    बेपरवाह वो हर हिस्से को बेपर्दा कर जाता
    के उसके हाथ की उंगली तुझे ओर नोचने लगती
    और उसकी हर बेरहमी पर तु राजी भी हो जाती ।
    जिस्म को होते रूह से जुदा उस शाम देखा है
    जिस्म को होते रूह से को ज़ुदा उस शाम देखा है
    तेरी हर चींख हर आवाज में ये अंजाम देखा है
    कैसे??
    अदा हर एक आहिस्ता से तूने यू बदल डाली
    कोई गिरगिट नजाकत से की जैसे रंग बदलता हो
    तेरा पल भर का शर्माना मेने उस रोज ना देखा
    तेरी पलको का झुक जाना मेने उस रोज ना देखा
    ना आहिस्ता से बाँहो में टूट कर सिमटते देखा
    तुझे कुछ और ही देखा
    तुझे उस रोज ना देखा |
    ©yaadoon_k_idiot_box_