• explorer_shashank 15w

    कई रंगों में यूँ तो उसने अपनी अलग दुनिया समेट ली थी, लेकिन हर रंग एक एहसास था। कोई रंग ओस नही था जिसमे वो या रंग उसमे घुल गया हो। हर वक़्त वो रोशनी में उन रंगों को तलाशता था, वो जो किसीने न पहचाना था, शायद जो रंग उसके लिए ही बना था।
    आज तक मैं उसे वही खड़ा देखता हूँ, सोचता हूँ मुठ्ठी खोल के दिखाऊँ की एक रंग मेरे पास भी है, जो शायद उसमे घुल सके। पर क्या वो मेरे रंग समझ पाएगी?