• chandrani 2w

    # दिल की कुछ अनकही बातें #

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    दर्द के रिश्ते

    जानते हो; बहुत तेज़ दर्द होता है;
    एक चुभन सी तकलीफ होती है;
    जो मेरा था सब खो गया,
    सारी खुशियाँ , सारी रौनक,
    और सबसे मज़ेदार बात ...
    पता है क्या???
    जो मेरा नहीं , वो कभी मेरा नहीं हो सकता...
    डर लगता है झूठे रिश्तों से..
    नहीं पता, पर अब डर लगता है खुदसे...
    डर लगता है खुश होने से...
    छीन जाती है खुशियाँ सारी...
    बस रह जाते है , गम के काले गहरे बादल...
    जिनसे बाहर निकलने का रास्ता ढूंढना ...
    नामुमकिन सा लगने लगता है...
    पहचाने चेहरे भी अजनबियों से लगते है...
    पता नहीं क्यों???
    पर अपने भी बेगाने से लगते है...
    दिल भी बहुत बुरी चीज़ होती है न..
    बस दर्द के सिवा कुछ भी नहीं देती,
    आंसू और तकलीफ बस इसके दो पहलु,
    समझ नहीं आता मैं खुद से अब क्या बोलू???
    कैसे मनाउ खुद को???
    कैसे समझाऊँ???
    ज़िन्दगी ने इतना क्रूर खेल खेला ,
    की अब इंसानों के खेल तो बस खेल ही लगते है;
    मन करता है खूब चिल्लाऊं रोऊँ...
    ज़िन्दगी से सवाल करूँ???
    आखिर क्यों ???
    मैं ही क्यों????
    हरबार मैं ही क्यों मिलती हूँ तुम्हे...
    खेलने के लिए....
    इंसान हूँ मैं ....
    कोई खिलौना नहीं....
    जान है मुझमें....
    मैं कोई बेजान गुड़िया नहीं।

    ©chandrani