• nikhilincredible 6w

    "लेखन-स्वर"

    प्रेम लिखो या मन का क्रोध लिखो
    अपने भीतर का हर विरोध लिखो,
    कभी दूरदर्शी कभी बन अबोध लिखो
    तुम लेखक हो तुम निर्विरोध लिखो!

    क़लम से तुम समाज का व्यवहार लिखो
    उत्तम दृष्टिकोण में समाहित विचार लिखो,
    बन सके जो एक मिसाल वो आचार लिखो
    तुम शब्दो में पिरोकर सुंदर एक संसार लिखो!

    न जाति न रंग तुम सबका बन आवाज़ लिखो
    जहाँ सभी हो समान एक ऐसा समाज लिखो,
    सौहार्द खिलखिलाए कुछ ऐसा तुम आज लिखो
    हिन्दू-मुस्लिम से परे प्रेम का प्रतीक वो ताज लिखो!

    अपनी हँसी,अपने आँसू तुम सारे भाव लिखो
    हौसलों को मिले बल कोई ऐसा दाँव लिखो,
    जो भी पाले हैं तुमने वो सारे अपने चाव लिखो
    कभी मरहम की बातें कभी अपने घाव लिखो!

    ईद की मिठास और होली के रंग लिखो
    तुम अपने भीतर का हर एक तरंग लिखो,
    जीवन में बना रहे सदैव ऐसा उमंग लिखो
    अपने सारे विचारों को शब्दों के संग लिखो!

    प्रेम लिखो या मन का क्रोध लिखो
    अपने भीतर का हर विरोध लिखो,
    कभी दूरदर्शी कभी बन अबोध लिखो
    तुम लेखक हो तुम निर्विरोध लिखो!
    ©nikhilincredible