• dr_pradeep_sehgal 22w

    धड़कन

    असीमित रास्ते...
    अपरिहार्य मंजिलें ...
    सीमित है यह जीवन...
    फिर--
    कैसी है यह लगन !
    कितना कुछ करना है...
    क्यों यह सब करना है ?
    पूर्णता है किसमे ?
    क्यों भटकता हूँ मैं ??
    सफ़र अपनी ही धड़कन का...
    निर्माण अपनी ही परिधि का...
    खोजता हूँ अपना ही आसमान --
    शब्द हैं कैसे ये गुंजायमान ...
    इन असीमित रास्तों पर...
    मंजिलों की चाहत पर...
    लड़ता हूँ ख़ुद से ही मैं...
    टकराहट में ख़ुद से--
    भटकना मेरे मन का...
    अग्नि यह कैसी है...
    धड़कन यह कैसी है !!
    ©dr_pradeep_sehgal