• satender_tiwari 5w

    फर्क है

    कोई जश्न में दारू बहाता है
    कोई पानी के लिए मीलों जाता है

    फर्क है

    कोई पिज़्ज़ा आधा खाकर फेंक देता है
    कोई आधी रोटी के लिए दिन रात भटकता है

    फर्क है

    कोई मखमल की चादर लिए सोता है
    कोई सोने के लिए जगह खोजता है

    फर्क है

    हम और आमीर होने का लालच रखते है
    कोई हमारे जैसे जीने का सपना देखता है

    फर्क है

    कोई सबकुछ पाकर भी खुश नही है
    कोई कुछ पाकर भी मुस्कुराता है

    फर्क है
    ©satender_tiwari