• arunendra 5w

    सुनो जानाँ

    तुम दूर हो तो जैसे मेरे प्राण गए , मेरे जीवन की आस गई 
    तर्षित था मैं जन्मों से,. तुम दूर हो तो मेरी प्यास गई 
    जीवित तो.... हूँ मैं 
    मैं हर्षित.... रह लेता हूँ 
    तुमसे दूर होकर चिंतन शून्य है पर 
    मैं कल्पित रहता हूँ एक आस में तुम्हारी मीठी यादों के साथ कि पुनः आओ तुम और भर लूँ तुम्हें अपनी उन्हीं बाहों में....
    जीनें की चाह है मेरी तुम संग, तुम दूर हो तो मेरी साँस गयी
    तर्षित था मैं जन्मों से,... तुम दूर हो तो मेरी प्यास गई 
    तुम पास होते हो.. तो प्रेम में होते हैं हम सुकून होता है
    तुम दूर जाती हो तो मनः शांति जाती है...छटपटाहट होती है
    तुम बिन मुझमें तेज नहीं 
    मुख की मेरे ...कांति गई 
    तुम ही हो मेरी कृष्ण प्रिये,तुम दूर हो तो मेरी रास गई 
    तर्षित था मैं जन्मों से,... तुम दूर हो तो मेरी प्यास गई 
    तुमसे ही तो जीवन है
    तुमसे ही तो बंधन है
    तुमसे ही हर्षित हूँ मैं 
    तुमसे ही जग नंदन है
    तुमसे ही तो सपने है ....नित बनती सपनों की आस नयी
    तर्षित था मैं जन्मों से,... तुम दूर हो तो मेरी प्यास गई
    ©AKM