• sufivibes 2w

    मेरी याद के बावर्चीखाने में,
    तेरे नाम का चूल्हा जलता है।।


    तेरी याद के चावल पकते है
    मेरा रोज़ पतीला जलता हैं।।

    मेरी सबर की इस कढ़ाई में,
    तेरे वादे सिकते रहते है।।

    तेरी हसरत में रोटी जलती है,
    मेरा हर बरतन कुछ कहता हैं
    मेरा हर बरतन कुछ सेहता हैं।।

    ©sufivibes