• nehulatagarg 13w

    के लिये कह रहें है उससे कईं ज्यादा घृणित चरित्र वाले व्यक्ति तो आपको कहेगा यह संसार लेकिन अब जब बात शुरू हुयी है तो फिर जल्दी से यह भी बता दीजिये की , ऐसी कौनसी मजबूरी इन सबके सामने रख दी है आपने जिसके कारण यह सब आपका चाहकर भी प्रतिरोध नहीं कर पा रहें है क्योंकि इतना तो सभी जानते है की , बिना किसी मजबूरी के कोई भी इतना असहाय नहीं हो सकता जिसे आप जैसे कायर लोग बन्धी बनाने में सफल हो जायें तो अब आप बता भी दीजिये की , कौनसा जाल बिछाया है आपने इन सबके सामने जिसे काटना तो दूर उससे बाहर निकलने का निश्चय भी नहीं कर पा रहें है यह लोग ? सौम्यदीप कहने लगते है - आपको इतनी अधीरता दिखाने की आवश्यकता नहीं है महारानी चित्रांगना परन्तु एक बार फिर से आपने दिखा ही दिया की , आप वाकई परिस्थितियों की अच्छी - खासी समझ रखती है तो हम भी आपको और ज्यादा विलम्ब नहीं करवायेंगे और अब आपको बता ही देते है की , वो कारण आखिरकार है क्या ? और यह कहकर सौम्यदीप सामने दूर एक ऊंचाई पर एक लकडी का चबूतरा संकरा सा बना होता है और जिस पर लकडी के दो स्तम्भों के बीच झूले में अगस्तय को रखें रहते है और नीचे आग जल रही होती है एक तगारी में और पास ही उनकी माँ कठिका खडी रहती है और यह देखकर अंगना बहुत ज्यादा घबरा जाती है और जैसे ही आगे बढने लगती है सीढ़ीयां उतरकर उस तरफ जाने के लिये तो तभी आधे रास्ते में पहुंचती है की , सौम्यदीप के सैनिक भालों से उनका रास्ता रोक लेते है और अंगना असहाय सी ठिठकी सी रह जाती है और अगस्तय के रोने की आवाज सबके साथ उसे भी बहुत ही ज्यादा व्याकुल और व्यथित कर देती है और उसे समझ नहीं आता की , आखिरकार वो उस नन्हीं जान को बचायें तो कैसे बचायें ? वो हताशा से गिरने ही वाली होती है की , सोम्यदीप उसे पकड लेते है और वो उन्हें चित्रांगद समझकर कहने लगती है अगस्तय की तरफ उसके रोने - बिलखने की आवाजें सुनकर - माँझी हमारे अगस्तय लेकिन जब सौम्यदीप की आवाज कानों में पडती है वो घृणा से भर जाती है और उसे

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    चित्रांगना

    - मांझी हमारे अगस्तय .. लेकिन जब सौम्यदीप की आवाज कानों में पडती है तो वो घृणा और क्रोध से भर जाती है और सौम्यदीप को धिक्कारती हुयी कहने लगती है - आप जैसे कायर और नपुंसक व्यक्तियों से तो यही कार्य हो सकता है और कोई कार्य करने की हिम्मत तो आप जैसे लोगों में होती ही नहीं लेकिन इस कृत्य से आपको क्या चाहिए अब यह भी बता दीजिये ? तो यह सुनकर सौम्यदीप बताने लगते है - आपको हमसे विवाह करना होगा और यदि आपने ऐसा नहीं किया तो आपका यह प्यारा परिवार मृत्यु को प्राप्त तो बाद में होगा परन्तु इस नन्हें बालक के प्राणों पर जरूर बन आयेगी । हमारी माँ अब इस बालक को तो लेकर जायेगी ही लेकिन यदि आपने कोई भी चालाकी की या आपके इन ससुराल वालों ने तो इस नन्हीं जान की जान तो जायेगी ही साथ ही उन हजारों बच्चों के प्राणों की समाप्ति भी हो जायेगी जिन्हें बन्धी बनाकर रखा गया है हमारे द्वारा । हमारा विवाह हुआ और यह बच्चा भी बच जायेगा साथ ही वो हजारों बच्चे भी । अंगना की आँखों में अंगारे से उतर आते है और चित्रांगद सहित सब भी बहुत क्रोध में आ जाते है और खुद को छुडाने की कोशिश करते है और छूट भी जाते है और सौम्यदीप पर प्रहार करने ही वाले होते है की , अंगना उन्हें रोक देती है इशारे से और चित्रांगद भी रूक जाते है और रोक लेते है अपने हाथ को । चित्रांगद को श्रृंगार कक्ष में लाया जाता है और जहाँ सौम्यदीप उन्हें अंगना को दुल्हन के रूप में तैयार करने को कहते है और चित्रांगद अंगना को आभूषण पहनाने लगते है लेकिन अंगना आनाकानी करने लगती है और बहुत ही असहाय सी रोती हुयी उन्हें देखकर उन्हें यह सब करने के लिये मना करती है लेकिन चित्रांगद अंगना को हिम्मत बंधाने लगते है और अंगना को यह सब बहुत बुरा लगता है और ऐसा महसूस होता है मानों कोई उनके जिस्म से उनकी जान निकाल रहा हो और वो भी बहुत बेरहमी से लेकिन वो चाहकर भी कुछ नहीं कर सकती और सबसे ज्यादा तकलीफ तो उसे चित्रांगद को देखकर होती है जो इतनी तल्लीनता और धैर्य के साथ उन्हें तैयार करने में लगे रहते है मानों जैसे कुछ हुआ ही