• ajayamitabh7 6w

    मैं कौन हूँ :अजय अमिताभ सुमन

    प्यार करोगे ,तो एक प्रेमी ,गर दुलार, तो हूँ मैं स्नेही।
    नफरत, तिरस्कार का ,इबादत , उपकार का ।
    हताश हूँ, फटकार पे ,निराश हूँ, दुत्कार पे ।
    उपहास से हूँ , क्लेशग्रस्त , और परिहास से, द्वेषत्रस्त ।

    अनादर पे, रोष हूँ मैं , प्रसंशा पे, मदहोश हूँ मैं ।
    हार का, संताप हूँ , जीत की, उल्लास हूँ ।

    सम्मान हूँ, जहाँ आदर है ,अभिमान हूँ, जहाँ सादर है ।
    भरोसे का विश्वास हूँ मैं , उत्साही की आस हूँ मैं ।

    भावों के संसार निरंतर, और इनके संप्रेषण ।
    कर रहा परिलक्षित हूँ मैं, एक प्रतिबिंबित दर्पण ।