• 50shades 14w

    सफर का ही

    अब ना मुझको याद बीता
    मैं तो लम्हों में जीता
    चला जा रहा हूँ
    मैं कहाँ पे जा रहा हूँ
    कहाँ हूँ

    इस यकीन से मैं यहाँ हूँ
    की ज़माना ये भला है
    और जो राह में मिला है
    थोड़ी दूर जो चला है
    वो भी आदमी भला था
    पता था

    ज़रा बस ख़फा था
    वो भटका सा राही मेरे गाँव का ही
    यो रस्ता पुराना जिसे आना
    ज़रूरी था लेकिन जो रोया मेरे बिन
    वो एक मेरा घर था
    पुराना सा डर था
    मगर अब ना मैं अपने घर का रहा
    सफ़र का ही था मैं सफर का रहा
    ओ ओ

    [इधर का ही हूँ ना उधर का रहा
    सफ़र का ही था मैं सफर का रहा] x 2

    मैं रहा.. ऊ ऊ
    मैं रहा.. वो ओ..
    मैं रहा..

    नील पत्थरों से मेरी दोस्ती है
    चाल मेरी क्या है राह जानती है
    जाने रोज़ाना, ज़माना वोही रोज़ाना

    शहर शहर फुरसतों को बेचता हूँ
    खाली हाथ जाता खाली लौटा हूँ
    ऐसे रोज़ाना, रोज़ाना खुद से बेगाना

    जबसे गाँव से मैं शहर हुआ
    इतना कड़वा हो गया की ज़हर हुआ
    मैं तो रोज़ाना
    ना चाहा था ये हो जाना मैंने

    ये उमर वक़्त रास्ता गुज़रता रहा
    सफ़र का ही था मैं सफ़र का रहा

    [इधर का ही हूँ ना उधर का रहा
    सफ़र का ही था मैं सफर का रहा] x 2

    मैं रहा.. ऊ ऊ
    मैं रहा.. वो..
    मैं रहा..

    सफ़र का ही था मैं सफर का रहा