• hayat_ey_isq 13w

    Ma

    खाली खाली था दिन
    मजबूरन मजदूर बन रहे थे

    चल रही थी गर्म हवाएं
    धूप आग उगल रही थी

    रो रहा था दिन
    तन पतला था

    फिर भी वो मा
    कोमल हाथो से मजदूरी कर रही थी ।

    सोशल मीडिया पे लोग
    लगे हुए थे मा को खुश करने के

    पर उसके बच्चे आंख लगाए बैठे थे
    कब आएगी मा उनकी
    एक आस लगाए बैठे थे

    देख अपनी मा को चहक ते चहरे उनके
    गले लिपट मुस्कुरा रहे थे

    मा के हाथ की सूखी रोटी और दाल से
    ही मात्र दिवस मना रहे थे ।।।

    खुशियां उनकी ,लबों पे मा का जाप
    रात भर मा की भाहों में दुबक के सो रहे थे

    मा उनकी भगवान थी
    ये मुस्कुराती लबों पे ममता साफ झलक आ रही थी ।।।।

    ऋषिका