• archanadanish 3w

    ख़ामोशी

    रात ख़ामोशी से बिखरी, आसमान की फ़र्श पर
    चाँद चुपके से यूँ आया ,चाँदनी के अर्श पर

    आज तारे भी ,नज़र आते नहीं हैं ,रोज़ से
    कोई तो है राजदारी ,आज कुछ तो बात है
    वरना जुगनू तो निकलते ,इस गली के मोड़ से
    ज़र्रा ज़र्रा आज ,कोई परददारी कर रहा

    लगता है फिर चाँद की ,रंगत नयी होने को है
    आएगा सूरज जो सुबह , तब खुलेंगे राज़ सारे
    तब तलक अफ़साना ,रात का चलता रहे
    तब तलक आँखों से कह दो ,ख़्वाब देखें दिलनशी

    सुबह मिलना आइने से, सुबह सच को देखना!!!