• kavitadhiman_ 23w

    संदीप

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    उदासी

    जीवन मेरा उदास हो गया
    पहले तो मै बहुत चंचल था
    अब कैसे मै शांत हो गया
    ऐसा क्या कुछ खास हो गया

    कुछ विश्वास टुटा, कुछ ठोकर खाई
    अकेला मै अपने आप हो गया
    जीवन मेरा ंउदास हो गया

    कुछ समझ नही आता क्या करू
    किसको पराया और किसको अपन कहूं
    जीवन मेरा उदास हो गया....

    तन मन मे एक बेचैनी है
    क्या करू क्या न करू
    किसकी सुनू किसको कहूं

    सोच सोच का फर्क है हे इश्वर

    इस उदासी मे भी मेरा फायदा होगया
    आज देखो मै तुम्हारे कितना पास हो गया
    जीवन जो मेरा उदास हो गया...

    पहले जीया झुटी दुनीया मे
    अब सच्ची दुनीया मे खो गया
    आज तुम्हारे कितना पास हो गया
    क्योकि
    जीवन जो मेरा उदास हो गया।
    ©kavitadhiman_