• khusi_the_happiness 21w

    याद

    एक याद है, मीठी सी
    पर तीखी है धार उसकी
    हर बार जो मिले मुझ से
    यादों की तस्वीर ज़िद्दी सी
    टूट सा जाता है बांध सब्र का
    धीरज दिलाये साहस चाहे जितना
    टूट ही जाता है भरोसा वक़्त का
    उम्मीदों को रखने के लिए जिंदा
    आती है रात ले के सितारों भरा अंधेरा
    और फिर छा जाता है हर ओर उजाला

    एक बूँद भी नहीं गिरती है आँसू की
    फिर भी रोता है दिल हर कहीं
    एक घाव भी नहीं दिखता है जग को
    फिर भी रिसता है लहू हर कहीं

    आहें आती है यादों की बंद चौखट से,
    वो अजनबी न लौटा दिल में कब से
    सीने की खामोश आहटों ने भी
    टटोला है कोना कोना हर एक चप्पा
    न जाने कब से छुपा है वो नादान कहीं
    लुक्का छुप्पी तो मैंने खेला ही नहीं कभी

    उस के न होने में है बातें उस की
    उस के खो जाने में है बातें उस की
    उस के लौट आने की उम्मीद में भी है
    चमक उसी की मीठी बातों की

    चंदा की चाहत में है बातें उसी की
    सूरज के सिमटने में है बातें उसी की
    उस की हर गैरमौजूद स्थिति में है
    बातें उस की खास मौजूदगी की
    उस की मौजूदगी की हर चाह में है
    बातें उसी के निरंतर होने की

    हर पैनी धार में है बातें उस की
    बातों की बातों में भी है बातें उसी की
    बंद आँखों के अरमान से लेकर
    खुली आँखों के ख्वाब तक
    बस बिखरी है हर बदल में
    बातें उसी की
    जो रह रह के बरस ही जाती है
    बन के बून्द बेबस आसुंओं सी
    याद है न, पूछती नही महूरत
    बस चली आती है
    देख बातें उस के न होने की

    ©khusi_the_happiness
    20 may 2018
    8.30am