• candid_cynic_bard 15w

    इस ज़िन्दगी के मायनों में ये सीख मिली कि...
    कुछ ख्वाहिशें तो वाजिब ही मुकम्मल नहीं होती..
    जो मिल जाती हर किसी को वफ़ा के बदले वफ़ा..
    तो यूं इस इश्क़ की आरज़ू हर इबादत में अव्वल नहीं होती..

    जब इश्क़ लिखा नहीं किस्मत में,
    तो क्या बदलते चेहरों पर एतबार करना..
    जब हर रिश्ता फरेब पे थमा है यहाँ...
    तो क्या किसी वफादार के मिलने का इंतज़ार करना...
    चले जाते हैं ये अजनबी चंद लम्हों को,
    इंतज़ार का पैमाना बता के..
    तो क्यूँ ही इन अवारा मौजों से इस अकेले किनारे
    को तलबगार करना...

    अरे लोग कर देते है मोहब्बत में बेतुके कसमें वादे..
    सिर्फ कह देने से कोई किसी दिल की धड़कन नहीं होती...
    कुछ ख्वाहिशें तो वाजिब ही मुकम्मल नहीं होती....

    ©candid_cynic_bard