• ibrar_ahmad 25w

    Hindi writer

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    सिर्फ मजहब हमारी पहचान तो नही
    तुम्हारे कहने से हम गद्दार तो नही।

    तुम हमे चाहे जितना भी भगा लो
    ये मुल्क सिर्फ तुम्हारे बाप का तो नही।

    लहू से हमने भी सींचा है इस जमीं को
    देश भक्ति के तुम अकेले ठेकेदार तो नही।

    आग से जला दो तुम बेशक बस्तियां हमारी
    उठता धुंध धुएं का ,आखिरी शाम तो नही।


    चाहे ख़ौफ़ का बना दो माहौल मुल्क का
    हम डर डर कर जियें वो इंसान तो नही।

    तुम्हारे चाहने से हम नही मिटगेे ज़ालिम
    तुम किसी के खुदा या भगवान तो नही।