• amritpalsinghgogia 25w

    कैसी है तू 19.8.16—7.51 AM

    तलब सी रहती है जाने बिना
    तेरे चेहरे पे नज़र थी
    एक ही मलाल था
    एक ही सवाल था…..कैसी है तू

    मिलना तो एक बहाना था
    मक़सद तो क़रीब आना था
    क़रीब आकर सच को जान लेना
    औरों की बात मान लेना…..कैसी है तू

    तेरी बातों में उलझा
    बहुत दूर निकल आया था
    सिर्फ़ एक बात पे नज़र थी
    और मैं ढूंढता रहा…..कैसी है तू

    तेरा मुस्कराना हँसते जाना
    अपने दिल की बातें
    एक एक कर के बताना
    और मैं ढूंढता रहा…..कैसी है तू

    तुमसे जो भी बात हुई
    आँसूओं की बरसात हुई
    दिल खोल के सुना तुझको
    जानने को आतुर था…..कैसी है तू

    तेरे चाहने वालों से
    मिलना भी होता था
    हर बात में तुझको ढूँढा
    हर बात में ख़ुद से पूछा …..कैसी है तू

    ख़्यालों में जब भी खोता था
    सपनों में तुझको पिरोता था
    तेरे बारे ही सबकुछ था
    एक ही चिंता ढोता था …..कैसी है तू

    हवा के रुख़ का भी
    इंतज़ार बना रहता था
    संशय सा बना रहता था
    कुछ तो ख़बर लगे….कैसी है तू ……………कैसी है तू
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