• kk_joy 6w

    जिल्लत की रोटी को तज कर वो भूखी सो जाती है
    जीती है गुर्बत में लेकिन मेहनत की रोटी खाती है

    वाक़िफ़ है शायद वो अपनी रुठी हुयी किस्मत से
    अथक परिश्रम कर के वो उसको रोज़ मनाती है

    छाती में अमृत धारा है हाथों में है भार लिये
    एक हाथ से श्रम साधा है दूजे से प्यार पिलाती है

    सफर कठिन संघर्ष बहुत है रस्ता भी आसान नहीं
    इस नामुमकिन को लेकिन वो मुमकिन बनाती है

    मेहनत का जब चले हथौड़ा किस्मत की दीवार पर
    किस्मत भी तब उसकी खातिर नयी राह बनाती है
    ©kk_joy