• kanishkdevesh 12w

    क़सीदा

    वो महफ़िल-ए-ग़ज़ल में गुनगुना क्या दिए
    लोग यादों में भर कर उन्हें ही ले गए
    हम तो पढ़ते रह गए क़सीदा उनके हुस्न का
    वो पलकें झुका कर मुस्कुराये सब लफ्ज़ फीके पड़ गए।

    ©kanishkdevesh