• nehulatagarg 10w

    अवनी - 35

    हमारे माँ - पापा ने हमें संस्कार नहीं दिये लेकिन आप तो अपने बच्चों को दे देते .. लेकिन संस्कार तो आप तब देते ना जब आप दोनों में होते और यह सुनकर दोनों भाईयों की त्यौरियां चढ जाती है । ऋषि शेखर के पास आकर कहते है - किस सोच में डूब गये है आप भाई और यह सुनकर शेखर की तन्द्रा टूटती है और वो विचारों को झटककर कहने लगते है , कुछ नहीं और फोन करते है किसी को तो सामने से आवाज आती है - हाँ जीजाजी ! आज इतने सालों बाद कैसे याद किया ? और यह सुनकर शेखर कहने लगते है - सुन्दर एक काम है तुमसे , तो कहिये ना जीजाजी मैं तो हमेशा आपके हुक्म की तामिल करने के लिये तैयार रहता हूँ , तभी तो तुम्हें फोन किया है मैंने । वैसे तुम लोग तो अपनी दीदी को भूल ही गये और इतने साल हो गये है लेकिन तुमने अभी तक अपनी दीदी को याद नहीं किया । - आप ही ने तो कहा था कि , जीजी को भूले से भी याद मत करना । - लेकिन अब याद करने का वक्त आ गया है और कल ही तुम अपनी दीदी को फोन करोगे और बताओगे कि , सासू माँ की तबीयत बहुत खराब है और ध्यान रखना कि , तबीयत इतनी भी