• alfaaz_20 6w

    इक पल को भी
    अब पलकें न झपकें
    इंतजार में सूखे
    भये पत्थर ये दो नैन
    फिर भी इनमें में तू
    काहे समाए ना?
    बीतती जाए ये रैन!
    तिल-तिल कर
    लुटता मोरा चैन!
    रोम-रोम करत है बैन
    कैसा ये खेल?
    ये इम्तिहान कैसा पिया?
    आसपास ही है कहीं
    मगर सामने तू आए ना
    इन नयनन में पिया
    तू काहे समाए ना?
    ©alfaaz_20