• deepali_kuesh 6w

    ऐ बारिश कहां से आई तू,
    तू आई तो थम थोड़ा जा,
    तू मासूम सी-कोमल सतरंगी,
    आ सिमट रूह में, मेरी समा।

    किस जहां की तू परी है,
    तू शीत शुद्ध सी बह-ने आई।
    कहां ठहरें ये मंजिलें तेरी,
    तू किस शहर की हरजाई?

    तेरी बूंद मोती से भव्य,
    तू उनकी छीट चड़ा देना।
    तेरा एहसास मखमल सा कोमल,
    तू मन मन्दिर संवार देना।

    तू स्वर्ग की रानी तो नहीं?
    बहुत दूर से सुना तू आती है।
    तू भी संसार सी संगम समुद्र,
    में नदियों साथ समाती है।

    महकती खिलखिलाती तू रोनक सी,
    बरस हर बरस जो आए।
    सावन खुशियां भर भर नीर,
    दिल सांसों में समा जाए।


    © दीपाली दुबे