• i_ujala0975 24w

    इबादत।

    ये सितारे अशना थे, जब इंतजार में दिया जलाया था हमने,
    ये नज़रे क़ासिद थी, जब पैगाम-ए-इश्क़ पहुंचाया था हमने,
    मेरे इश्क़ की ताबीर फितूर नहीं, इबादत है,
    यूहीं नहीं बेखबर तेरी मुस्कुराहटों के लिए अश्कों को छिपाया था हमने।

    - उजाला।