• adityakunwar 26w

    मैने तुम्हारे आँखो के दरमियां जज़्बातो का दरिया किसी ख़ास के लिए मुन्तज़िर करते देखा है,
    इस दिल-ए-समंदर में मोहब्बती तरंगों को आसमां से दिदार कर चहकते देखा है;

    महताब को अपने नूर से सारे ज़माने को दिलदार बनाते इस ज़मीन पर शिरकत करते पहली दफ़ा देखा है;

    चाँद-सितारों को तोड़ने के वायदो का किस्सा बहुत आशिकों से सुना है,
    इस दफ़ा तो हमने भी तुम्हे फ़लक पर बिठाने का हक उस चाँद से छीन,हमारी दूरियों की तिश्रगी को दूर कर मोहब्बत करने का मुकम्मल मक़सद देखा है ।

    आदित्य कुंवर
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