• the_witty_writer 14w

    घर से दूर,
    इन अनजान रहो में,
    आज भी ये दिल थोड़ा थोड़ा डरता है।
    हर कदम पर, हर सफर में
    एक ही शक्श को याद करता है।
    हा,
    बढ़ा ज़रूर हो गया है ये,
    फिर भी उनकी ये हमेशा चिंता करता रहता है।
    हर पल में, हर सांस में,
    एक ही नाम निकलता है।
    माँ,
    ये दिल कितना भी बहादुर हो जाये,
    फिर भी अनजान राहो से ये डरता है।
    ये कितना भी क्यों न जाता पाए,
    ये दिल आपकी परवाह करता है।
    हा,
    आज भी इसे मुश्किलो में,
    तुम्हारी याद आती है,
    तुम्हारी तस्वीर अक्सर ,
    आखों में आंसू दे जाती है।
    पर ,
    फिर भी ये आपका उतना ही सम्मान करता है,
    मा,
    आज भी ये दिल उन अनजान राहो से डरता है।

    -हर्षित।