• rohitrai 16w

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    धर्ती की कोख से जन्मी थी
    बड़ी प्यारी थी,
    सन्सार का शृजन किया जिसने
    वो आज की अबला नारी थी।।

    दुनिया का बोछ उठाए जो
    उसका बोछ कोई न चाहे,
    ये किस बात की लड़ाई थी
    फिर भी वो चुप रही, कुछ न बोली
    ना किसी से मदद माँगी,
    ये उसकी खुदरी थी
    वो आज की अबला नारी थी।।

    खुद लड़ी आगे बढ़ी
    जब जान की दुश्मन
    उसकी खुद की जवानी थी
    वो आज की अबला नारी थी।।

    अफसोस नहीं उसे किसी बात का
    की साथ उसके कोई खड़ा नहीं,
    वो खुद ही सक्षम है
    क्योंकी नाम उसे कमानी थी
    वो आज की अबला नारी थी।।

    तानों की कमि न थी
    जो उसको सुनाई थी,
    इन तानों को चुनौती समझ कर
    जो मैदान में उतरी थी,
    वो आज की अबला नारी थी।।

    दो तो क्या सौ ले आओ
    जो सभ पर भारी थी,
    वो आज की अबला नारी थी।।

    कोई जवाब ना था जब उसके हुनर का,
    तब जली ये दुनिया सारी थी
    वो आज की अबला नारी थी।।

    जब इतना लिखा तब सोच पड़ा
    कि, वो सच मे अबला नारी थी।
    नहीं!!
    ज़माने को टक्कर दिया जिसने
    वो लड़की मरदानी थी।।

    -- रोहित राय

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    मरदानी

    वो सच मे अबला नारी थी।
    नहीं!!
    ज़माने को टक्कर दिया जिसने
    वो लड़की मरदानी थी।।
    (read the caption)
    ©rohitrai