• imaginer 23w

    I am just numb on the humanity..

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    किसकी परवाह

    बहन तो बस मेरी है
    दुसरों की हो, तो मुझे क्या परवाह
    हवस तो ये मेरी है
    उसकी इज़्जत, मुझे क्या परवाह
    नज़र तो मेरी है
    जिस्म उसका, मुझे क्या परवाह
    मैं तो हुं वयस्क
    चाहे वो बच्ची, मुझे क्या परवाह
    मैं तो हुं मर्द
    वो कमज़ोर नारी, मुझे क्या परवाह
    मेरे घर मे हैं मा-बहन
    वो दुसरे घर कि, मुझे क्या परवाह
    हर कोई बुझाता है अपने जिस्म की आग
    ये देश है बहुत बड़ा, मुझे क्या परवाह
    यहां डरता नहीं कानून से कोई भी आम
    मैं तो फ़िर भी सरकारी हुं, मुझे क्या परवाह
    उसका जीवन इतना ही था
    मैं तो हुं ज़िंदा, मुझे क्या परवाह
    कह लो जिसे जो कहना है
    मेरे कान तो बंद हैं, मुझे नहीं कोई परवाह |

    ©imaginer